चोपन में अंतिम सफर भी मुश्किल! बदहाल श्मशान घाट पर सुविधाओं का भारी अभाव

सोनभद्र। चोपन क्षेत्र में सोन नदी के तट पर स्थित श्मशान घाट लंबे समय से बदहाली का सामना कर रहा है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील और जरूरी कार्य के लिए आने वाले लोगों को भी यहां बुनियादी सुविधाओं के अभाव में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक घाट पर प्रतिदिन औसतन दो से चार शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद वहां सुविधाओं का पर्याप्त इंतजाम नहीं है। दाह संस्कार के दौरान मृतक के परिजनों को धूप और बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे रहना पड़ता है। घाट पर पक्के शेड अथवा प्रतीक्षालय की व्यवस्था नहीं होने से लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है।

बिजली-पानी और शौचालय तक का अभाव

श्मशान घाट पर प्रकाश की समुचित व्यवस्था नहीं होने से रात के समय अंतिम संस्कार में दिक्कत आती है। इसके अलावा पीने के पानी और शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दूरदराज से आने वाले परिजनों को इन छोटी लेकिन बेहद जरूरी सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ता है।
लोगों ने बताया कि अंतिम संस्कार के लिए शव को घाट तक लाने-ले जाने के लिए भी कोई समर्पित शव वाहन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जरूरतमंद परिवारों को निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है।

जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से उठी व्यवस्था सुधारने की मांग

श्मशान घाट की बदहाली को लेकर स्थानीय नागरिकों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि चोपन क्षेत्र महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों वाला इलाका होने के बावजूद यहां अंतिम संस्कार स्थल जैसी मूलभूत सुविधा की अनदेखी चिंताजनक है।

स्थानीय लोगों ने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से इस समस्या का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है।


क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि सोन नदी तट स्थित श्मशान घाट का जल्द से जल्द जीर्णोद्धार कराया जाए। दाह संस्कार स्थल पर स्थायी शेड, बैठने के लिए प्रतीक्षालय, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और शौचालय का निर्माण कराया जाए। साथ ही जरूरतमंद परिवारों के लिए शव वाहन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अंतिम संस्कार स्थल पर सुविधाएं उपलब्ध कराना किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति का मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा से जुड़ी बुनियादी जरूरत है। लोगों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई है। यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

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