सोनभद्र। जनपद पुलिस ने गोवंश तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से वांछित अभियुक्त राजा कुरैशी उर्फ हासिन कुरैशी को गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर सोनभद्र लाकर न्यायालय भेज दिया। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई गोवध निवारण अधिनियम के मुकदमे की विवेचना के दौरान सामने आए एक संगठित अंतरराज्यीय तस्करी और वित्तीय नेटवर्क के खुलासे के बाद की गई। पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) ऋषभ रुणवाल के नेतृत्व तथा क्षेत्राधिकारी सदर सुधीर कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में सर्विलांस एवं पुलिस टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर यह सफलता हासिल की।
करोड़ों के लेन-देन का खुलासा
पुलिस जांच में अब तक 25 से अधिक बैंक खातों का विश्लेषण किया जा चुका है। इन खातों में करीब 80 से 100 करोड़ रुपये के लेन-देन की जांच की गई है। विवेचना में सामने आया कि गोवंश तस्करी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न व्यक्तियों, व्यापारिक खातों और CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) खातों के माध्यम से कई चरणों में स्थानांतरित कर वास्तविक स्रोत और लाभार्थियों को छिपाने का प्रयास किया जाता था।
पश्चिम बंगाल से संचालित होता था वित्तीय नेटवर्क
पुलिस के अनुसार बड़ी मात्रा में नकद धनराशि पश्चिम बंगाल के पांडुआ और मेमारी क्षेत्र से जमा कराई जाती थी। इसके बाद यह रकम बिहार और उत्तर प्रदेश के विभिन्न खातों में भेजी जाती थी, जहां से एटीएम, यूपीआई और नकद निकासी के जरिए स्थानीय पशु तस्करों तक पहुंचाई जाती थी।
यह था तस्करी का पूरा रूट
जांच में सामने आया कि गोवंशों को पहले सोनभद्र, मिर्जापुर और वाराणसी से छोटे वाहनों के जरिए बिहार के चैनपुर और खुर्माबाद पहुंचाया जाता था। वहां से बड़े कंटेनरों में 50 से 80 गोवंश भरकर पश्चिम बंगाल के पांडुआ पशु बाजार और मेमारी ले जाकर स्थानीय व्यापारियों और वधशालाओं तक पहुंचाया जाता था।
कई आरोपी पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस अब तक सोनभद्र, मिर्जापुर, बिहार और पश्चिम बंगाल के कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस का कहना है कि अन्य बैंक खातों, तकनीकी साक्ष्यों और इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की जांच अभी जारी है। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि गोवंश तस्करी एक संगठित बहुस्तरीय अंतरराज्यीय नेटवर्क के माध्यम से संचालित की जा रही थी, जिसमें परिवहन, वित्तीय लेन-देन और धन वितरण के लिए अलग-अलग व्यक्तियों एवं खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच आगे भी जारी है।

