प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को दिखाता है सही दिशा : हेमनाथ पाण्डेय

मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती पर ईश्वर प्रसाद महाविद्यालय में विचार गोष्ठी, साहित्यिक योगदान पर हुई चर्चा।

सोनभद्र। महान साहित्यकार एवं कथाकार मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती के अवसर पर ईश्वर प्रसाद स्नातकोत्तर महाविद्यालय एवं ईश्वर प्रसाद लॉ कॉलेज, देवरा राजा के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य, उनके व्यक्तित्व और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।

गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रबंध समिति के संरक्षक हेमनाथ पाण्डेय ने मुंशी प्रेमचंद को कालजयी साहित्यकार बताया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं समय के साथ और अधिक प्रासंगिक होती जा रही हैं। उनका साहित्य सामाजिक कुरीतियों, आर्थिक असमानता, मानवीय संवेदनाओं और आमजन की समस्याओं को सामने लाने के साथ ही समाज को सही दिशा देने का कार्य करता है।
समाजशास्त्री डॉ. विमलेश कुमार त्रिपाठी ने प्रेमचंद की प्रमुख रचनाओं का उल्लेख करते हुए उनके सामाजिक सरोकारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने शतरंज के खिलाड़ी, मंत्र, पूस की रात और नमक का दारोगा सहित विभिन्न कहानियों एवं उपन्यासों के माध्यम से प्रेमचंद द्वारा समाज की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत किए जाने की चर्चा की।

कार्यक्रम का विषय-प्रवर्तन मृत्युंजय पाठक ने किया, जबकि संचालन भोलानाथ मिश्र ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती एवं मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण और धूप-दीप अर्पित कर की गई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं के विचारों से महाविद्यालय का सभागार साहित्यिक एवं वैचारिक वातावरण से सराबोर रहा।

इस दौरान वाणिज्य संकाय के विनय प्रजापति, कला संकाय के राजेश द्विवेदी, विमलेश पाठक, राजनीति विज्ञान विभाग के बृजेश पटेल, गीता मौर्य, कार्यालय अधीक्षक विनीत, रामचंद्र पाण्डेय, सरिता समेत महाविद्यालय एवं लॉ कॉलेज के शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

कार्यक्रम के समापन पर महाविद्यालय एवं लॉ कॉलेज के प्रबंधक मनीष पाण्डेय ने सभी छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों और कर्मचारियों को मुंशी प्रेमचंद जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रेमचंद के साहित्य और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए समाजहित में सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया।

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