नई दिल्ली से शुरू हुआ राष्ट्रीय अभियान, जागरूकता, कानूनी कार्रवाई और पुनर्वास पर रहेगा विशेष फोकस; 782 जिलों के प्रतिनिधि हुए शामिल
मदन मोहन चंदौली : नई दिल्ली चंदौली और सोनभद्र में बाल तस्करी (चाइल्ड ट्रैफिकिंग) के खिलाफ अब निर्णायक लड़ाई छेड़ दी गई है। बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत ग्राम स्वराज समिति ने वर्ष 2030 तक बाल तस्करी के खात्मे का लक्ष्य तय करते हुए व्यापक जनअभियान शुरू करने का ऐलान किया है। यह घोषणा विश्व मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान की गई, जहां ‘नेशनल कैंपेन अगेंस्ट चाइल्ड ट्रैफिकिंग’ का शुभारंभ हुआ।
ग्राम स्वराज समिति ने स्पष्ट किया कि सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस, ग्राम पंचायतों और आम नागरिकों के सहयोग से चंदौली व सोनभद्र को बाल तस्करी मुक्त बनाने के लिए गांव-गांव अभियान चलाया जाएगा। संस्था का कहना है कि यह केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई है।
तीन मोर्चों पर चलेगी निर्णायक कार्रवाई अभियान के तहत गांवों और कस्बों में लगातार जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्थानीय स्तर पर सक्रिय बाल तस्करों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी। आर्थिक रूप से कमजोर और संवेदनशील परिवारों के बच्चों को शिक्षा एवं सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हें तस्करी के खतरे से बचाया जाएगा। वहीं, तस्करी से मुक्त कराए गए बच्चों के सुरक्षित पुनर्वास, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन की व्यवस्था भी अभियान का अहम हिस्सा होगी।

देशव्यापी नेटवर्क से जुड़े 782 जिले, 1.22 लाख से अधिक बच्चों को मिला नया जीवन
यह अभियान बाल अधिकारों के लिए कार्यरत देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) के चार दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श कार्यक्रम का हिस्सा है। कार्यक्रम में देश के 782 जिलों से 250 से अधिक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। ग्राम स्वराज समिति भी इसी नेटवर्क की सहयोगी संस्था है। संस्था के अनुसार, अप्रैल 2023 से दिसंबर 2025 के बीच JRC के कानूनी हस्तक्षेप अभियान के माध्यम से 1,22,516 बच्चों को बाल तस्करी के चंगुल से मुक्त कर सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराया गया है।
“बच्चे को बचाना सबसे बड़ा मानव धर्म” — सावित्री ठाकुर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि किसी एक बच्चे की जिंदगी बचाना भी सबसे बड़ा मानवीय कार्य है। उन्होंने कहा कि मासूम बच्चियां अक्सर मानव तस्करी और यौन शोषण का शिकार हो जाती हैं। ऐसे में उन्हें सुरक्षित निकालने वाले सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता समाज के सच्चे रक्षक हैं।
हर घंटे 11 बच्चे लापता, मानव तस्करी तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध
ग्राम स्वराज समिति के निदेशक महेशानन्द भाई ने चिंता जताते हुए कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में हर घंटे औसतन 11 बच्चे लापता होते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या बाल तस्करी के जाल में फंस जाती है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन कई बच्चे तस्करी और जबरन मजदूरी का शिकार बन रहे हैं। हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी के बाद मानव तस्करी दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध बन चुकी है। उन्होंने कहा कि तस्कर अक्सर आसपास के परिचित लोगों के रूप में गरीब परिवारों को नौकरी, अच्छी शिक्षा या बेहतर भविष्य का लालच देकर बच्चों को अपने साथ ले जाते हैं और बाद में उन्हें बंधुआ मजदूरी, भिक्षावृत्ति तथा यौन शोषण जैसे अपराधों में धकेल देते हैं। इसलिए संस्था का पूरा जोर रोकथाम, त्वरित बचाव और प्रभावी पुनर्वास पर रहेगा।
बाल तस्करी के खिलाफ शुरू हुआ यह राष्ट्रीय अभियान अब चंदौली और सोनभद्र जैसे संवेदनशील जिलों में सामाजिक जागरूकता, प्रशासनिक सतर्कता और जनभागीदारी के जरिए बच्चों के सुरक्षित भविष्य की नई उम्मीद बनकर उभरा है।

