सोनभद्र में अब तक 9,827 बेटियों के हाथ पीले, सरकार ने खर्च किए 55.22 करोड़ रुपये; 2026-27 में 740 विवाह का लक्ष्य
सोनभद्र। आदिवासी बाहुल्य सोनभद्र में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के लिए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना बड़ी राहत और सहारा बनकर सामने आई है। विवाह का खर्च उठाने में असमर्थ परिवारों की बेटियों का विवाह सरकार की सहायता से सम्मानपूर्वक संपन्न कराया जा रहा है। योजना के तहत अब तक जनपद में 9,827 बेटियों का विवाह कराया जा चुका है, जिस पर सरकार ने करीब 55 करोड़ 22 लाख रुपये खर्च किए हैं।
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना है। सामूहिक विवाह के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों पर विवाह के खर्च का बोझ कम होता है और वे सामाजिक सम्मान के साथ अपनी बेटियों का विवाह संपन्न करा पा रहे हैं।
आदिवासी और ग्रामीण परिवारों को मिल रहा लाभ
सोनभद्र जैसे आदिवासी एवं ग्रामीण बहुल जनपद में योजना की उपयोगिता और भी बढ़ जाती है। जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवार योजना का लाभ लेकर अपनी बेटियों का विवाह करा रहे हैं। पात्र लाभार्थियों को शासन की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार आर्थिक सहायता के साथ विवाह से संबंधित सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह भदौरिया के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 250 बेटियों का विवाह कराया जा चुका है, जबकि इस वित्तीय वर्ष में 740 विवाह कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सिर्फ विवाह नहीं, परिवारों को सम्मान का सहारा
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान के साथ बेटियों का घर बसाने का अवसर भी बन रही है। आर्थिक संकट के कारण विवाह को लेकर चिंतित परिवारों को सरकारी सहयोग मिलने से उनका बोझ कम हो रहा है।
वर्षवार इतने विवाह हुए
वित्तीय वर्ष
संपन्न विवाह
2017-18
305
2018-19
1,335
2019-20
424
2020-21
416
2021-22
966
2022-23
2,180
2023-24
1,355
2024-25
1,325
2025-26
1,253
2026-27
250
कुल
9,827
55.22 करोड़ रुपये की सरकारी सहायता और हजारों बेटियों के विवाह के आंकड़े बताते हैं कि सोनभद्र में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी राहत का माध्यम बन रही है।

