मध्यस्थता की गोपनीयता और प्री-लिटिगेशन के प्रचार-प्रसार पर जोर
सोनभद्र : उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ की वर्ष 2026-2027 की कार्ययोजना के क्रियान्वयन के क्रम में जनपद न्यायालय के ए०डी०आर० भवन में बुधवार को मध्यस्थतागण अधिवक्ताओं की एक महत्वपूर्ण मासिक बैठक आयोजित की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सोनभद्र के सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिविजन) श्री राहुल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मुकदमों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण निस्तारण को लेकर कई अहम दिशा-निर्देश दिए गए।
मध्यस्थता की गोपनीयता बनाए रखने के कड़े निर्देश
बैठक को संबोधित करते हुए सचिव श्री राहुल ने सभी मध्यस्थ अधिवक्ताओं को निर्देशित किया कि मध्यस्थता की कार्यवाही पूरी तरह से गोपनीय होती है, जो सामान्य न्यायालयीन कार्यवाहियों से भिन्न है। यदि मध्यस्थता सफल हो जाती है, तो दोनों पक्षकारों को न्यायालय में यह बताए बिना कि कार्यवाही के दौरान क्या हुआ, समझौता प्रस्तुत करना चाहिए। यदि मध्यस्थता असफल रहती है, तो मध्यस्थ को अपनी रिपोर्ट में केवल एक लाइन लिखकर न्यायालय को भेजनी चाहिए। रिपोर्ट में उन प्रस्तावों या चर्चाओं का उल्लेख बिल्कुल नहीं होना जो मध्यस्थता के दौरान हुई थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पक्षकार हस्ताक्षरयुक्त निपटान करार पर नहीं पहुंचते, तब तक इसे अंतिम करार नहीं माना जा सकता। यदि मध्यस्थता की घटनाओं का खुलासा होता है, तो इससे पूरी प्रक्रिया की गोपनीयता समाप्त हो जाएगी।
उपभोक्ता अधिकारों और प्री-लिटिगेशन पर विशेष बल
सचिवालय द्वारा आम जनमानस को उपभोक्ता फोरम और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का निर्देश दिया गया, ताकि लोग अपनी शिकायतों को सही मंच पर दर्ज करा सकें। इसके साथ ही, वैवाहिक विवादों को मुकदमे से पूर्व के चरण (प्री-लिटिगेशन स्टेज) में ही सुलझाने पर विशेष जोर दिया गया। मध्यस्थता केंद्र पर आए आम लोगों को यह समझाया गया कि वे न्यायालय में वाद दायर करने से पहले जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से प्री-लिटिगेशन स्तर पर अपने आपसी विवादों का समाधान आसानी से करा सकते हैं।
लंबित मामलों की समीक्षा और आगामी लोक अदालत की तैयारी
सिविल जज/सचिव ने मध्यस्थता केंद्र में लंबित मामलों की प्रगति की गहन समीक्षा की और मामलों के शीघ्र निस्तारण हेतु आवश्यक सुझाव दिए। उन्होंने मध्यस्थों से कहा कि वे पक्षों के बीच बेहतर संवाद स्थापित कर एक निष्पक्ष माहौल तैयार करें। इसके अलावा, आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के लिए अधिक से अधिक प्री-लिटिगेशन और न्यायालय में लंबित मामलों को मध्यस्थता के लिए संदर्भित करने पर भी व्यापक चर्चा की गई।
बैठक में जनपद के कई सम्मानित अधिवक्ता एवं मध्यस्थगण उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से श्रीमती पूनम सिंह, श्री सोहन लाल, श्री रामचन्द्र सिंह, श्री मोहम्मद फारूक, श्री आस मोहम्मद अली, श्रीमती निर्मला शर्मा, श्री रमेश राम पाठक, श्रीमती बिन्दू यादव, श्री पवन कुमार मिश्रा, श्री अमरेश चन्द्र पाण्डेय, श्री मुनिराज साह, श्री राधे श्याम पाण्डेय, श्री सेराज अख्तर खां, श्री नितेन्द्र देव पाण्डेय, श्रीमती चन्द्रावती जैसवार और श्री अनिल कुमार सिंह शामिल रहे।
इसकी जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सोनभद्र के पूर्णकालिक सचिव एवं सिविल जज (सी०डि०) श्री राहुल द्वारा दी गई है।

