खसरा अभिलेख गायब होने के मामले में 8 साल बाद भी जांच अधूरी, जवाबदेही पर उठे सवाल

(ऋषभ सिंह)सोनभद्र। नगर पालिका से वर्ष 2018 में खसरा अभिलेख गायब होने के मामले में लगभग आठ वर्ष बीत जाने के बावजूद जांच पूरी न होने और उसके परिणाम सार्वजनिक न किए जाने पर सवाल उठने लगे हैं। मामले में अज्ञात लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन अब तक न तो जांच की स्थिति स्पष्ट की गई है और न ही दोषियों के विरुद्ध किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने आई है।
जनपद में लगातार बढ़ते भूमि विवादों के बीच खसरा जैसे महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेख का गायब होना प्रशासनिक व्यवस्था और अभिलेखों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। पूर्व में उम्भा जैसी दुखद घटना भूमि विवादों से जुड़ी रही है, वहीं वर्तमान में भी तहसील दिवसों में सबसे अधिक शिकायतें जमीन संबंधी मामलों की ही प्राप्त होती हैं।
ऐसे में नागरिकों का कहना है कि यदि पुलिस जांच पूरी कर चुकी है तो क्लोजर रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। यदि जांच अभी भी लंबित है, तो इसकी समय-सीमा निर्धारित कर निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच पूरी की जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध विधि के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने लंबे समय तक जांच लंबित रहने से कई तरह की आशंकाएं जन्म लेती हैं। उनका मानना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है तथा ऐसे संवेदनशील मामलों में समयबद्ध कार्रवाई और सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है।
अब लोगों की निगाहें संबंधित विभाग और पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि इस मामले में जांच की वर्तमान स्थिति क्या है और वर्षों से लंबित इस प्रकरण का निष्कर्ष कब सामने आएगा।

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