(ऋषभ सिंह)सोनभद्र। जनपद में मछलियों के प्रजनन काल को संरक्षित करने और जलीय जैव विविधता के संरक्षण के उद्देश्य से जिला मजिस्ट्रेट चर्चित गौड़ ने 1 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक सभी नदियों, तालाबों और जलाशयों में मत्स्य आखेट (मछली पकड़ने) पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है। इस संबंध में आदेश जारी करते हुए संबंधित विभागों, मत्स्य अधिकारियों एवं जलाशय ठेकेदारों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। जारी आदेश के अनुसार प्रतिबंध अवधि के दौरान किसी भी व्यक्ति द्वारा प्रजननशील मछलियों को पकड़ना, मारना, बेचना अथवा पकड़ने का प्रयास करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा विस्फोटक पदार्थ, विषैले रसायन अथवा किसी भी अवैध तरीके से मछली पकड़ने पर भी सख्त रोक रहेगी।
जिलाधिकारी ने रिहंद, धंधरौल, कड़ियाताल, पुरखासताल, जीवारताल समेत सभी जलाशयों के ठेकेदारों को निर्देशित किया है कि 30 जून की मध्यरात्रि से पूर्व अपनी नावें और जाल जलाशयों से बाहर करा लें। साथ ही क्षेत्रीय मत्स्य प्रभारियों को प्रतिबंध अवधि में नियमित निगरानी कर मत्स्य आखेट पूरी तरह बंद कराने तथा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जलधाराओं के प्राकृतिक प्रवाह में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न करना, मत्स्य बीज, अंगुलिका अथवा मछलियों को पकड़ना, नष्ट करना या अवैध रूप से उनका दोहन करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उत्तर प्रदेश मत्स्य अधिनियम, 1948 के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अवैध रूप से उपयोग किए जा रहे जाल, नाव, उपकरण एवं पकड़ी गई मछलियों को भी जब्त किया जाएगा। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि मछलियों के संरक्षण और जल संसाधनों के संतुलन को बनाए रखने के लिए प्रतिबंध अवधि के दौरान मत्स्य आखेट से दूर रहें तथा नियमों के पालन में प्रशासन का सहयोग करें।

