ब्रिटैन के नागरिक श्री वैभव देवल जैन का जीवन जैन-समाज ही नहीं अपितु समस्त युवा-पीढ़ी व प्रत्येक प्रवासीय व अप्रवासीय भारतीयों के लिए प्रेरणास्रोत
पर्यावरण एवं संस्कृति संरक्षण एवं मानव कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष सुशील कुमार जैन ने बताया कि सागर एवेन्यू, भोपाल निवासी श्री वैभव देवल परम पूजनीय आचार्यश्री 108 विद्यासागर जी महा मुनिराज (समाधिस्त) की प्रेरणा, मार्गदर्शन से पिछले कई वर्षों से प्राणी-मात्र की रक्षा व समाज सेवा के कार्यों से जुड़े हैं।

एक समय वर्ष 2015 में जब श्री वैभव देवल लंदन से नेमावर (खातेगांव) आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के दर्शनार्थ आए एवं कुछ समय पहले ही उनके बचपन के मित्र ऋषिकेष जैन (Prof SATI कॉलेज, विदिशा) की मुनि दीक्षा हुई थी जो अब आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के संघ में 108 श्री शीतल सागर जी महाराज के नाम से जाने जाते हैं जब इन दोनों मित्रों का मिलन हुआ तो वैभव देवल के आसूं थम नहीं रहे थे। मुनिश्री तब अपने मित्र को आचार्य श्री से मिलवाते हैं। आचार्य श्री ने वैभव देवल को भारत वापस आकर भारत माँ की सेवा करने की प्रेरणा दी। भारतीय युवाओं के विदेश जाकर बसने को लेकर गुरुजी के मन की व्यथा को सुनकर भी आपको अत्यंत वेदना हुई और आपको समझ आ गया कि भारत के शिक्षित नौजवान जो चंद पैसों और आरामदायक जीवन शैली के लिए विदेश में बस गए हैं,उन्हें यहाँ देश में रहकर ही भारत माँ की सेवा करनी चाहिए। तब आपने स्वयं को गुरुचरणों में समर्पित कर गुरुजी की पीड़ा को दूर करने के साथ-साथ देश की युवा पीढ़ी के लिए उदाहरण बनने का निर्णय लिया और आप उस समय का सालाना 50 लाख रुपए का पैकेज छोड़कर पुनः भारत आ गए।
एक बार जब वैभव देवल आचार्य श्री के दरसनार्थ आये श्रद्धालुओं की भीड़ को पंक्तिबद्ध कर रहे थे… तब आपने देखा कि उस पंक्ति में बहुत से लोग मरणासन्न थे जो कैन्सर जैसे रोगों से लड़ रहे थे। बहुत से लोग आप से विनती कर रहे थे कि किसी तरह गुरुदेव का आशीर्वाद दिलवा दीजिए। कुछ महीने पहले ही विदेश से एक लम्बे प्रवास (12 वर्ष ) के बाद लौटे वैभव देवल को यह स्थिति नागवार गुज़र रही थी, गुरुदेव का आशीर्वाद सभी को दिलाना उनके लिए सम्भव नहीं था। वे बहुत ही चिंतित थे एवं उनका मन बहुत उद्वेलित था क्योंकि विदेश जाने के पहले उन्होंने ऐसे रोगियों की भीड़ कभी नहीं देखी थी। वह रात वैभव देवल के लिए बहुत कठिन थी। सयोंग से अगले दिन आचार्य श्री के प्रवचन भारत में बढ़ते हुए कैंसर जैसे असाध्य रोगों पर था जिसमें आचार्य श्री ने बताया की इन सब रोगों का मुख्य कारण खेतों में डाले जाने वाला रसायन, कीटनाशक, फ़ास्ट फ़ूड, गाय-भैंस में लगाए जाने वाला इंजेक्शन, एवं हमारे रोज मर्रा में उपयोग होने वाले प्रसाधन जैसे साबुन, शैम्पू, लिपस्टिक, फेस क्रीम आदि हैं। श्री वैभव देवल को लगा की अब उनको आचार्य श्री से स्पष्ट मार्ग दर्शन मिल गया है एवं उन्होंने अहिंसक सिद्धांतों का परिपालन करने हेतु गुरुजी के मार्गदर्शन अनुसार अहिंसक पद्धति से निर्मित उत्पादों के निर्माण एवं जैविक खेती करने का निर्णय लिया।
अब आप भोपाल में विद्यांजलि अहिंसा सौन्दर्य प्रा लि कंपनी की स्थापना कर अहिंसात्मक तरीकों से दैनिक जीवन में उपयोग आने वाले उत्पादों का सफलता पूर्वक निर्बाध रूप से निर्माण एवं वितरण कर रहे हैं, साथ ही समाज के कई लोगों को भी अपने साथ रोजगार प्रदान कर अच्छी,अहिंसक, स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली प्रदान करने हेतु प्रयासरत हैं। आपने कुछ 7-8 वर्ष पहले सतपुड़ा पहाड़ी पर आदिवासी गाँवो में होने वाली विषमुक्त एवं गोबरखाद,गौमूत्र पर आधारित पारम्परिक खेतों को चिन्हित किया एवं इन गाँवो की मुलभूत समस्या जैसे स्वच्छ जल के संकट को ट्यूबवेल खुदवा कर दूर किया एवं सरकार से जैविक खेत होने का सर्टिफिकेट भी दिलवाने में मदद करते हुए उन्नत खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया, आज यहाँ 100 मेट्रिक टन से अधिक जैविक गेहूं, दाल, चावल, मेथी, राई आदि का उत्पादन हो रहा है एवं विद्यांजलि के नाम से ये खादन्न बहुत प्रचलित एवं लोकप्रिय भी हो रहा है। अपनी माँ के किचिन एवं किचिन गार्डन से शुरू हुआ वैभव देवल का प्रयास आज करोड़ों के बिज़नेस में बदल गया है जिसमें 25000 वर्ग फ़ीट में फैला गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में एक प्लांट, 10 गिर गाय की गौशाला एवं 50 एकड़ की जैविक कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग सम्मलित है। वैभव देवल ने आज समाज के सभी युवाओं को प्रेरणा दी हैं की अपने देश में रहते हुए ही देश की समस्याओं का समाधान कर सभी के अच्छे स्वस्थ, खुशहाली, समृद्धि का प्रयास करना चाहिए।

